वीना सहगल
मैं एक बड़ी संस्था में कार्यरत हूं | सरकार संस्था से विभिन्न विषयों पर सूचना मांगती है और हमें संबंधित विभागों से वह सूचना एकत्रित कर ईमेल करना पङती है | इसी संबंध में पिछले दिनों हुआ एक अनुभव मुझे नई सीख दे गया | एक सुचना को एकत्रित करने के लिए मेरी सहयोगी ने संबंधित विभागाध्यक्ष को पत्र लिख दिया और फिर सारा दिन दौड़ भाग कर सूचना एकत्र कर शाम को ईमेल किया | मुझे उसकी कार्यशैली पर गुस्सा आया | मैंने कहा कि "तुम यूं दौड़ भाग कर सूचना क्यों एकत्रित करती रही , फ़ोन पर ही माँगवा लेतीं |" वह कुछ न बोली | एक दिन मेरी सहयोगी छुट्टी पर थी तो यह काम मुझे ही करना पडा | मैंने कई पत्र भेजें और फ़ोन भी किए लेकिन कोई भी सूचना पाने में असफ़ल रही | जब सभी उपाय करके देख लिए तो फिर मुझे खुद ही उस विभाग में जाना पड़ा | तब जाकर शाम सात बजे तक मैं काम पूरा कर पाई और फिर आकर मैंने ईमेल किया | तब जाकर मैंने समझा कि यह काम वाकई में इतनी आसानी से नहीं हो सकता हैं | मैंने जान लिया कि किसी को कुछ भी कहना आसान है लेकिन करना मुश्किल |
May 29, 2018
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राजा विक्रमादित्य के पास सामुद्रिक लक्षण जानने वाला एक जयोतींषि पहुँचा |विक्रमादित्य का हाथ देखकर वह चिंतामग्न हो गया |उसके शास्त्र के अनुसार तो राजा दीन , दुर्लब और कंगाल होना चाहिए था , लेकिन वह तो सम्राट थे, स्वसथ थे |लक्षणों में ऐसी विपरीत स्थिति सम्ब्भ : उसने पहली बार देखी थी | जयोतींषि की दशा देखकर विक्रमादित्य उसकी मनुदशा समझ गए और बोले की "बाहरी लक्षणों से अगर आपको संतोष ना मिला हो तो छाती चीरकर दिखाता हुँ , भीतर के लक्षण भी देख लिजिए " |तब ज्योतिषी ने कहा की - "नहीं , महाराज ! मैं समझ गया की आप निर्भय हैं , पुरुषार्थी हैं , आपमें पूरी क्षमता हैं " | इसलिए अपने पिरिस्थितयों को अनुकूल बना लिया है और भाग्य पर विजय प्राप्त कर ली है |
Moral - स्थिति एंव दशा मनुष्य का निर्माण नहीं करती , यह तो मनुष्य है जो स्थिति का निर्माण करता हैं | एक दास सवतन्त्र व्यक्ति हो सकता है और सम्राट एक दस बन सकता है |
January 29, 2018
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एक दिन एक धनी आदमी अपने बेटे को गाँव की सैर पर लेकर गया | वह अपने बेटे को दिखाना चाहता था की कोई कितना गरीब हो सकता है | उन्होंने एक गरीब परिवार के खेत में समय बिताया | उस के बाद धनी आदमी ने आपने बेटे से पूछा "तुमने देखा वह कितने गरीब है ? तुमने क्या सिखा इस से ?". बेटे ने कहा ," हमारे पास एक कुत्ता है , उनके पास चार है ," हमारे पास पूल हैं , उनके पास नदी है ," हमारे पास रात को रोशनी के लिए लालटेन है , उनके पास सितारे हैं ," हम खाना खरीदतें हैं , वह अपना भोजन खुद उगाते हैं," हमारे पास खुद को बचाने के लिए दीवारे हैं , उनके पास मित्र हैं ," हमारे पास विश्वकोष है, उनके पास ग्रन्थ हैं | फिर उस ने आगे कहा "शुक्रिया पिताजी मुझे यह दिखाने के लिए की हम कितने गरीब हैं " |
नैतिक सिख -- यह धन के बारे में नहीं है जो हमें अमीर बनाता है. हम अपनी जिन्दगी को कितनी सादगी से जीते हैं उस के बारे में हैं .
January 17, 2018
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