• Home
facebook google twitter tumblr instagram linkedin
  • Home
  • Travel
  • Life Style
    • Category
    • Category
    • Category
  • About
  • Contact
  • Download

LifeStories

ऐसी कहानियाँ जो दुनिया देखने का नजरिया बदल दे |

डॉ. सुषमा जुक्ला

मैं ट्रेन में बैठी थी की मेरा ध्यान सामने वाली सीट पर बैठी बुुजुर्ग महिला पर गया | कारण था उनके हाथ में मौजूद ऊन और सलाइयां | अमूमन आजकल महिलाअों के हाथ में भी मोबाइल ही दिखता है |          कुछ देर बाद उन्होंने पूछा - 'कहाँँ जा रही हो ? ' और बातों का सिलसिला चल पडा | मुझसे बातें करते हुए भी बराबर उनके हाथ बुनाई कर रहे थे |    नागदा स्टेशन आते-आते उन्होंने एक ख़ूबसूरत टोप तैयार कर लिया था | मैंने उत्सुुकतावश पूछा - 'घर में कोई नया मेहमान आने वाला हैं  |'    वे  हसी और बोली की मेरे घर में तो नहीं , लेकिन मातृछाया में तो नए मेहमान आते ही रहते हैं |मुझे बात समझ नही आई तो उन्होंने सारी  बातें विस्तार से बताई । यह मेरा समय गुज़ारने का तरीका है | मुझे सत्संग और कथा वाचनों में जाने में कोई रूचि नहीं है | जब से सेवानिवृत हुई हूँ , समय काटना बड़ा मुश्किल था |  बेटा - बहूू अपने कम में और पोता - पोती पढ़़ाई  में | इसलिये एक दिन बाज़ार में जाकर ऊन ले आई और बुनना शुरू कर दिया |   बहु ने कहा की किसके लिए बुन रहे हो माँ ? आजकल के बच्चे तो रेडीमेड और महंगे कपड़े ही पसंद करते हैं | बात तो सही थी | लेकिन मैंने स्वेटर बुनना जारी रखा और पहला स्वेटर अपनी कामवाली  बाई के लड़के को उपहार में दिया | तब विचार आया कि क्यों न अनाथ बच्चों के लिए बुनना जारी रखुं | बस तभी से छोटे - मोटे मोज़े ,टोपे , स्वेटर आदि बुनती रहती हूँ | साल भर में इतने सेट बुन लेती हूँ की दिवाली पर मातृछाया में सभी बच्चों को एक-एक सेट दे सकूँ |मैंने पूछा ," इसमें तो बहुत खर्चा आता होगा , ऊन तो खरीदना ही पड़ता हैं ?' वे मुस्कुरा कर बोली "सरकार इतनी पेंशन देती हैं , उसमें से थोड़ा खर्च कर भी दिया तो क्या ?" आजकल इससे ज्यादा तो बच्चे एक बार बाहर खाना खाने में खर्च कर देते हैं | सबसे बड़ी बात कि इससे मन को बहुत संतोष मिलता है | साथ ही समय का सदुपयोग भी हो जाता है | अब तो कई लोग मुझसे बेबी ब्लैनेट और बेबी सूट अादि बनाने का अनुरोध करते है |'मैंने उनके काम से बेहद प्रभावित हुई | जिस तरह उन्होंने समय का सदुपयोग  कर अपने हुनर को सार्थकता दी है वह काबिले तारिफ़  हैं |

May 27, 2018 No comments

एक 24 साल का लड़का ट्रेन की खिड़की से बाहर देख कर चिल्ला रहा था........."देखिए पिताजी पेड़ पीछे जा रहे है !"पिताजी मुस्कराए और उनके सामने वाले सीट पर एक युवा जोड़ा बैठा था , जो उस लड़के के बचकानाव्यवहार को देख रहा था , अचानक उस लड़के ने फिर से कहा"पिताजी देखो हमारे साथ बादल चल रहे हैं  "जोड़े ने विरोध नहीं किया और लड़के के पिता से कहा की ....."आप अपने बेटे को किसी अच्छे चिकित्सक के पासक्यों नहीं ले जाते ?" लड़के का पिता मुस्कुराते हुए बोला...."मैंने किया और हम आज हॉस्पिटल से ही आ रहे हैंमेरा बेटा जन्म से ही अंधा था और आज ही उसकी आँखें ठीक हुई हैं"



Moral--- बिना किसी को पूरी तरह जाने उस के बारे में 
फ़ैसला ना करे | उसका सच आपके होश उड़ा सकता हैं

January 29, 2018 No comments
Older Posts

About me

About Me


Aenean sollicitudin, lorem quis bibendum auctor, nisi elit consequat ipsum, nec sagittis sem nibh id elit. Duis sed odio sit amet nibh vulputate.

Labels

Best Best Motivaltional Stories best motivation stories Besty Site For Motivational Quotess LifeStorBest Motivaltional Stories LifeStories motivational Motivational Quotes motivational stories in hindi stories in hindi World Best Motivational Quotes World Best Motivational Quotesies

recent posts

Blog Archive

  • ▼  2018 (7)
    • ▼  June (1)
      • शक्तिशाली कौन
    • ►  May (3)
    • ►  January (3)

Popular Posts

  • कथनी करनी का अंतर
    वीना सहगल     मैं एक बड़ी संस्था में कार्यरत हूं | सरकार संस्था से विभिन्न विषयों पर सूचना मांगती है और हमें संबंधित विभागों से वह सूच...
  • समय का सदुपयोग
    डॉ. सुषमा जुक्ला मैं ट्रेन में बैठी थी की मेरा ध्यान सामने वाली सीट पर बैठी बुुजुर्ग महिला पर गया | कारण था उनके हाथ में मौजूद ऊन और...
  • जीवनशैली
    बाई अभी तक नही आई थी और पति बैंक गए हुए थे । अखबार पढ़ने के बाद कुछ सहेज कर रखी पति्रकाओं को देखा फिर अन्य कामों की  व्यवस्था के बीच ...
  • छोटी कहानी बड़ी सोच के साथ
    एक दिन एक धनी आदमी अपने बेटे को गाँव की सैर पर लेकर गया | वह अपने बेटे को दिखाना चाहता था की कोई कितना गरीब हो सकता है |  उन्होंने एक ग...
  • हर किसी की जिन्दगी की अपनी कहानी होती है
    एक 24 साल का लड़का ट्रेन की खिड़की से बाहर देख कर चिल्ला रहा था......... "देखिए पिताजी पेड़ पीछे जा रहे है !" पिताजी मुस्कराए और...
  • भाग्य से बढकर पुरुषार्थ है
    राजा विक्रमादित्य के पास सामुद्रिक लक्षण जानने वाला एक जयोतींषि पहुँचा | विक्रमादित्य का हाथ देखकर वह चिंतामग्न हो गया | उसके शास्त्र ...
  • शक्तिशाली कौन
    पिता अपने आईपीएस बेटे के चेम्बर में जाकर उसके कंधे पर हाथ रखकर खड़े हो गए और प्यार से अपने पुत्र से पूछा , ' इस दुनिया का सबसे शक्तिश...

ABOUT AUTHOR

Created with by ThemeXpose | Distributed By Gooyaabi Templates